वर्तमान सीमा: ₹5 करोड़ (1 अगस्त 2023 से)

ई-इनवॉइस सीमा चेकर (पात्रता + लागू होने की तिथि)

₹5 करोड़ की कुल टर्नओवर सीमा के आधार पर जाँचें कि क्या आपके व्यवसाय के लिए जीएसटी ई-इनवॉइसिंग (IRN) अनिवार्य है। पैन-वार कुल कारोबार का आकलन करें, नियम 48(4) छूट समझें और धारा 122 के जुर्माने से बचें।

अंतिम समीक्षा: 7 मई 2026 • कानूनी सलाह नहीं • जीएसटी एवं IRP पोर्टल से पुष्टि करें
त्वरित नियम

ई-इनवॉइसिंग केवल एक जीएसटीएन पर नहीं, बल्कि एक ही पैन (PAN) के तहत सभी पंजीकरणों के कुल वार्षिक कारोबार (AATO) पर निर्भर करती है।

AATO मान्यता

FY 2017-18 के बाद से किसी भी वित्तीय वर्ष का उच्चतम टर्नओवर दर्ज करें। यदि किसी एक वर्ष में भी सीमा पार हुई, तो नियम लागू रहेगा।

अगला कदम

यदि ई-इनवॉइसिंग लागू होती है, तो बिल बनाने हेतु हमारे जीएसटी इनवॉइस जनरेटर और जीएसटी कैलेंडर का उपयोग करें।

ई-इनवॉइसिंग प्रयोज्यता जाँचें

वित्त वर्ष 2017-18 के बाद का अपना उच्चतम पैन-वार टर्नओवर दर्ज करें और पात्रता देखें।

कानूनी सलाह नहीं • टर्नओवर परीक्षण और छूट अधिसूचनाओं द्वारा बदल सकते हैं। परिणाम पर निर्भर रहने से पूर्व आधिकारिक पोर्टल से पुष्टि करें।

ई-इनवॉइस चेकर लोड हो रहा है…
सुरक्षा नोट: यह केवल एक सांकेतिक गणना है। इनवॉइस जारी करने से पूर्व आधिकारिक जीएसटी / IRP पोर्टल (einvoice1.gst.gov.in) पर नवीनतम स्थिति सत्यापित करें।

वर्तमान नियम स्नैपशॉट एवं सामान्य छूट

गलतियों से बचने हेतु त्वरित संदर्भ। बिलिंग प्रणाली लागू करने से पूर्व अपनी श्रेणी हेतु लागू अधिसूचनाओं की पुष्टि करें।

वर्तमान व्यापक सीमा
₹5 करोड़ (लागू तिथि: 01 अगस्त 2023)
कारोबार गणना का आधार
समान पैन पर पंजीकृत सभी राज्यों का कुल वार्षिक कारोबार (AATO)।
लागू होने पर क्या बदलता है?
सभी बी2बी बिलों पर IRP द्वारा IRN और QR कोड अनिवार्य हो जाता है।

नियम 48(4) के तहत सामान्य छूट प्राप्त श्रेणियां

बैंक / एनबीएफसी / वित्तीय संस्थान (Banking & NBFC)
बीमा कंपनियाँ (Insurance Companies)
माल परिवहन एजेंसी (Goods Transport Agency - GTA)
यात्री परिवहन सेवा प्रदाता (Passenger Transportation)
मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल प्रवेश टिकट (Cinema Admission)
विशेष आर्थिक क्षेत्र इकाइयां (SEZ Units - डेवलपर नहीं)
छूट की शर्तें अधिसूचनाओं द्वारा परिवर्तित हो सकती हैं। SEZ डेवलपर्स को छूट नहीं है, केवल SEZ Units को छूट प्राप्त है।

त्वरित अनुपालन दिशा-निर्देश

  • • ई-इनवॉइसिंग अनिवार्य होने के बाद बिना IRN के जारी किया गया बिल गैर-कानूनी माना जाता है और खरीदार को आईटीसी (ITC) नहीं मिलता।
  • • अपनी बिलिंग प्रणाली या एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (ERP) को IRP एपीआई या JSON प्रारूप हेतु पहले से तैयार रखें।
  • • किसी भी विवाद की स्थिति में अपने चार्टर्ड एकाउंटेंट या कर सलाहकार से कानूनी परामर्श अवश्य लें।

ई-इनवॉइसिंग (E-Invoicing) क्या है?

जीएसटी के तहत ई-इनवॉइसिंग का अर्थ पोर्टल पर इनवॉइस बनाना नहीं है, बल्कि आपके अपने सॉफ्टवेयर में तैयार किए गए इनवॉइस को सरकार के इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर रिपोर्ट करके एक अद्वितीय IRN (Invoice Reference Number) और डिजिटल क्यूआर कोड प्राप्त करना है।

इनपुट (Input)
वित्त वर्ष 2017-18 के बाद का उच्चतम वार्षिक टर्नओवर
जाँच (Check)
₹5 करोड़ की सीमा + नियम 48(4) छूट श्रेणियां
परिणाम (Output)
अनिवार्य / आवश्यक नहीं / छूट प्राप्त + प्रभावी तिथि

टर्नओवर की गणना कैसे की जाती है?

ई-इनवॉइसिंग की पात्रता की गणना धारा 2(6) के तहत परिभाषित पैन-वार कुल वार्षिक कारोबार (AATO) के आधार पर की जाती है। इसमें एक ही पैन के अंतर्गत देश भर के सभी राज्यों में स्थित शाखाओं और पंजीकृत स्थानों की कुल बिक्री शामिल होती है।

कुल टर्नओवर में क्या शामिल होता है?
  • कर-योग्य बिक्री (स्थानीय एवं अंतर-राज्यीय)
  • कर-मुक्त एवं शून्य-दर आपूर्ति (Exempt / Nil-rated)
  • वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात (Exports)
  • एक ही पैन के विभिन्न जीएसटीएन के बीच आपसी आपूर्ति
महत्वपूर्ण सुझाव

यदि आपके पास दिल्ली और महाराष्ट्र में अलग-अलग जीएसटीएन हैं, तो दोनों का कुल टर्नओवर जोड़कर ₹5 करोड़ की सीमा देखी जाएगी। अलग-अलग राज्यों का टर्नओवर अलग नहीं गिना जाता।

सुरक्षित मूल्यांकन हेतु वित्त वर्ष 2017-18 से अब तक का अपना अधिकतम टर्नओवर दर्ज करें।

ई-इनवॉइसिंग कार्यान्वयन समयरेखा (Phases)

भारत सरकार ने ई-इनवॉइसिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू किया है। समय के साथ कारोबार की सीमा को घटाया गया है:

चरण 1: 01 अक्टूबर 2020
₹500 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले बड़े उद्यमों हेतु लागू।
चरण 2 से 5: 2021–2022
सीमा क्रमशः ₹100 Cr, ₹50 Cr, ₹20 Cr और ₹10 Cr की गई।
चरण 6: 01 अगस्त 2023
वर्तमान प्रभावी नियम: ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले सभी बी2बी कारोबारियों हेतु अनिवार्य।

व्यावहारिक उदाहरण

टर्नओवर और छूट के आधार पर ई-इनवॉइसिंग पात्रता के उदाहरण।
व्यवसाय परिदृश्यवार्षिक कारोबारप्रयोज्यता स्थितिकारण
निर्माता / व्यापारी (Manufacturer/Trader)₹6 करोड़अनिवार्य (Applicable)वर्तमान ₹5 करोड़ की सीमा पार हो चुकी है।
सेवा प्रदाता (Services Firm)₹3.5 करोड़आवश्यक नहीं (Not required)टर्नओवर ₹5 करोड़ की अधिसूचित सीमा से कम है।
माल परिवहन एजेंसी (GTA)₹40 करोड़छूट प्राप्त (Exempt)नियम 48(4) के तहत GTA को विशेष छूट प्राप्त है।

जुर्माना एवं अनुपालन जोखिम (धारा 122)

यदि आपके व्यवसाय पर ई-इनवॉइसिंग लागू होती है और आप बिना IRN के सामान्य इनवॉइस जारी करते हैं, तो जीएसटी कानून के तहत इसे अमान्य इनवॉइस माना जाता है।

लागू होने वाले दंड:
  • धारा 122(1): इनवॉइस जारी न करने या गलत इनवॉइस जारी करने पर ₹10,000 या कर राशि (जो भी अधिक हो) का जुर्माना प्रति इनवॉइस।
  • धारा 125: गलत दस्तावेज जारी करने हेतु ₹25,000 तक का सामान्य जुर्माना।
  • क्रेता का ITC नुकसान: बिना IRN वाले इनवॉइस पर ग्राहक कानूनी रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा नहीं कर सकता, जिससे व्यापारिक संबंध प्रभावित होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सटीकता एवं आधिकारिक स्रोत

यह पृष्ठ और कैलकुलेटर सामान्य व्यावसायिक समझ एवं केंद्रीय माल और सेवा कर नियमों के नियम 48(4) के आधार पर तैयार किया गया है। सरकारी अधिसूचनाओं द्वारा नियमों में संशोधन संभव है।
अंतिम समीक्षा: 7 मई 2026

संबंधित टूल्स एवं अगले कदम

ई-इनवॉइसिंग और जीएसटी अनुपालन को सरल बनाने हेतु उपयोगी टूल्स।

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