जीएसटी अनुपालन गाइड वित्त वर्ष 2025–26
अंतिम समीक्षा: 8 मई 2026

जीएसटी इनवॉइस फॉर्मेट

सीजीएसटी नियम 46 के तहत जीएसटी बिल के अनिवार्य फील्ड्स समझें — जीएसटीएन, क्रमानुसार इनवॉइस नंबर, HSN/SAC, कर-योग्य मूल्य, कर विभाजन (CGST/SGST बनाम IGST), और आपूर्ति का स्थान (POS)।

त्वरित नियम

एक वैध टैक्स इनवॉइस में सप्लायर व खरीदार का नाम, पता, जीएसटीएन, बिल नंबर, दिनांक, एचएसएन, दर व कर विभाजन होना आवश्यक है।

कब उपयोग करें

जब आप यह जांचना चाहते हैं कि आपके बिल में खरीदार को ITC दिलाने और रिटर्न मिलान हेतु आवश्यक सभी नियम पूरे हैं या नहीं।

संबंधित जांच

खरीदार का GSTIN सत्यापित करें और सही HSN/SAC कोड चुनें।

⚠️ सुरक्षा एवं विधिक सूचना:यह पृष्ठ सामान्य शैक्षिक एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन हेतु है। TheGSTCalculator.in कोई सरकारी वेबसाइट नहीं है। हमारा इनवॉइस जनरेटर केवल प्रिंट करने योग्य ड्राफ्ट इनवॉइस व कोटेशन बनाता है, आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड नहीं करता। अंतिम बिल जारी करने से पूर्व जीएसटी पोर्टल पर नियमों की पुष्टि अवश्य करें।

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जीएसटी इनवॉइस फॉर्मेट क्या है?

जीएसटी कानून की धारा 31 के अनुसार टैक्स इनवॉइस एक पंजीकृत सप्लायर द्वारा खरीदार को जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है, जिसमें आपूर्ति की गई वस्तुओं या सेवाओं का विवरण और वसूला गया कर दर्शाया जाता है। सीजीएसटी नियमों के नियम 46 (Rule 46)के तहत इनवॉइस में लगभग 16 अनिवार्य फील्ड्स होना आवश्यक है ताकि खरीदार कानूनी रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा कर सके।

नियम 46 के अनिवार्य फील्ड्स (Checklist)

सप्लायर का विवरण
आपूर्तिकर्ता का नाम, व्यावसायिक पता और 15-अंकीय GSTIN।
इनवॉइस नंबर (क्रम संख्या)
अधिकतम 16 अक्षरों का एक अद्वितीय और क्रमिक सीरियल नंबर (FY हेतु विशिष्ट)।
जारी करने की तिथि
जिस तारीख को इनवॉइस आधिकारिक रूप से जनरेट किया गया है।
प्राप्तकर्ता का विवरण
खरीदार का नाम, पता और बी2बी सौदों में उसका GSTIN।
HSN / SAC कोड
वस्तुओं हेतु HSN कोड और सेवाओं हेतु SAC कोड का सही अंकन।
वस्तु/सेवा का विवरण
आपूर्ति किए गए सामान या सेवा का स्पष्ट एवं संक्षिप्त नाम व विवरण।
मात्रा एवं इकाई (Unit)
माप की इकाई (जैसे Kg, Pcs, Mtr) और आपूर्ति की गई कुल संख्या।
कर-योग्य मूल्य (Taxable Value)
जीएसटी जोड़ने से पहले का वास्तविक शुद्ध विक्रय मूल्य।
लागू जीएसटी दर
लागू कर स्लैब की प्रतिशत दर (जैसे 0%, 5%, 12%, 18%, या 28%)।
कर राशि का स्पष्ट विभाजन
इंट्रा-स्टेट हेतु CGST + SGST और इंटर-स्टेट हेतु IGST का अलग उल्लेख।
आपूर्ति का स्थान (Place of Supply)
राज्य का नाम व कोड जहां वस्तु या सेवा का उपभोग हुआ है।
अधिकृत हस्ताक्षर
आपूर्तिकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि का भौतिक अथवा डिजिटल (DSC) हस्ताक्षर।

जीएसटी इनवॉइस का मानक नमूना संदर्भ

विवरण (Description)HSN/SACमात्राकर-योग्य मूल्यदरCGSTSGSTIGSTकुल देय
इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स (इंट्रा-स्टेट)
सामान - MH से MH
8471xx10 Pcs₹10,00018%₹900₹900—₹11,800
सॉफ्टवेयर कंसल्टेंसी (इंट्रा-स्टेट)
सेवा - KA से KA
9983xx1 Unit₹5,00018%₹450₹450—₹5,900
औद्योगिक उपकरण (इंटर-स्टेट)
सामान - MH से KA
8205xx2 Pcs₹2,00012%——₹240₹2,240
💡 त्वरित नियम: समान राज्य में बिक्री होने पर CGST + SGST लागू होता है और अंतर-राज्यीय बिक्री होने पर केवल IGST लगाया जाता है।

माल (Goods) बनाम सेवा (Services) का इनवॉइस

माल का इनवॉइस (Goods)

  • HSN कोड: 4 या 6 अंकों का HSN कोड अनिवार्य।
  • मात्रा एवं इकाई: Kg, लीटर, मीटर या पीस का उल्लेख।
  • ई-वे बिल: ₹50,000 से अधिक माल परिवहन पर आवश्यक।
  • 3 प्रतियां: मूल प्रति (क्रेता), द्वितीय प्रति (ट्रांसपोर्टर), तृतीय प्रति (विक्रेता)।

सेवा का इनवॉइस (Services)

  • SAC कोड: 99 से शुरू होने वाला 6-अंकीय सर्विस कोड।
  • सेवा विवरण: कार्य की अवधि व परियोजना का विवरण।
  • आपूर्ति का स्थान (POS): सही टैक्स निर्धारण हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण।
  • 2 प्रतियां: मूल प्रति (क्रेता) और द्वितीय प्रति (विक्रेता)।

कर विभाजन: CGST + SGST बनाम IGST

इंट्रा-स्टेट आपूर्ति (समान राज्य)

सप्लायर: महाराष्ट्र → खरीदार: महाराष्ट्र

  • कर-योग्य मूल्य: ₹1,000
  • CGST (9%): ₹90
  • SGST (9%): ₹90
  • कुल देय बिल राशि: ₹1,180
इंटर-स्टेट आपूर्ति (अलग-अलग राज्य)

सप्लायर: महाराष्ट्र → खरीदार: कर्नाटक

  • कर-योग्य मूल्य: ₹1,000
  • IGST (18%): ₹180
  • कुल देय बिल राशि: ₹1,180

इनवॉइस पर HSN / SAC कोड की अनिवार्यता

वस्तुओं का वर्गीकरण HSN द्वारा और सेवाओं का वर्गीकरण SAC कोड द्वारा किया जाता है। सही वर्गीकरण से सही टैक्स दर सुनिश्चित होती है और खरीदार के ITC मिलान में कोई तकनीकी त्रुटि नहीं आती।

4-अंकीय HSN कोड:पूर्व वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ तक के कुल कारोबार वाले व्यवसायों हेतु बी2बी बिलों पर 4 अंकों का HSN कोड लिखना अनिवार्य है।
6-अंकीय HSN कोड:₹5 करोड़ से अधिक कुल टर्नओवर वाले व्यवसायों हेतु सभी बी2बी बिलों पर 6 अंकों का HSN/SAC कोड लिखना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

टैक्स इनवॉइस बनाम बिल ऑफ सप्लाई

टैक्स इनवॉइस (Tax Invoice)

नियमित करदाताओं द्वारा कर-योग्य वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति पर जारी किया जाता है। इसमें जीएसटी दर व कर राशि स्पष्ट रूप से लिखी जाती है, जिससे खरीदार को ITC मिलता है।

मानक बी2बी / बी2सी

बिल ऑफ सप्लाई (Bill of Supply)

कंपोजिशन डीलरों द्वारा अथवा पूरी तरह कर-मुक्त आपूर्ति हेतु जारी किया जाता है। इसमें ग्राहक से कोई कर नहीं वसूला जा सकता और खरीदार को इस पर ITC नहीं मिलता।

कर वसूलना वर्जित

अंतिम इनवॉइस जारी करने से पूर्व चेकलिस्ट

सप्लायर का नाम, पता व 15-अंकीय GSTIN
क्रमिक सीरियल इनवॉइस नंबर श्रृंखला
वर्तमान इनवॉइस जनरेशन तिथि
शुद्ध कर-योग्य मूल्य (Taxable Value)
लागू जीएसटी स्लैब प्रतिशत (%)
कर विभाजन (CGST/SGST या IGST)
रिवर्स चार्ज (RCM) लागू होने का उल्लेख
ई-इनवॉइस (IRN) अथवा ई-वे बिल जांच
राउंड-ऑफ सहित कुल अंतिम बिल राशि

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जीएसटी इनवॉइस कब जारी करना चाहिए?

माल की आपूर्ति (Supply of Goods)

सामान्य नियम के अनुसार माल को फैक्ट्री या गोदाम से हटाने से पहले या हटाने के समय इनवॉइस जारी करना अनिवार्य है। निरंतर आपूर्ति (Continuous Supply) के मामलों में स्टेटमेंट जारी होने के समय बिल बनाया जाता है।

सेवाओं की आपूर्ति (Supply of Services)

सेवाओं के मामलों में सेवा प्रदान करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर इनवॉइस जारी करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों हेतु यह समयसीमा 45 दिन है।

नोट: समयसीमा का उल्लंघन करने पर धारा 122 के तहत विलंब अथवा गलत इनवॉइसिंग हेतु जुर्माना लगाया जा सकता है।

ई-इनवॉइस (IRN) एवं धारा 122 चेतावनी

यदि पूर्व वित्तीय वर्षों में आपका कुल कारोबार ₹5 करोड़ से अधिक रहा है, तो केवल सामान्य पीडीएफ बिल बनाना गैर-कानूनी है। आपको सरकारी IRP पोर्टल (जैसे einvoice1.gst.gov.in) से IRN (Invoice Reference Number) और डिजिटल हस्ताक्षरित क्यूआर कोड प्राप्त करना अनिवार्य है।

महत्वपूर्ण सूचना:बिना IRN के जारी किया गया इनवॉइस कानूनन अमान्य माना जाता है, जिससे खरीदार को ITC नहीं मिलता और प्रति बिल ₹10,000 या कर राशि का जुर्माना लग सकता है।

ई-इनवॉइस टर्नओवर सीमा चेकर उपयोग करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या जीएसटी इनवॉइस का कोई तय आकार (Size) या निश्चित लेआउट होता है?

नहीं। जीएसटी कानून (नियम 46) में अनिवार्य फील्ड्स (जैसे GSTIN, HSN, कर विभाजन आदि) निर्धारित हैं, लेकिन कोई विशिष्ट फॉन्ट या विज़ुअल लेआउट अनिवार्य नहीं है। अधिकांश व्यवसाय स्पष्टता हेतु मानक A4 या A5 आकार का उपयोग करते हैं।

क्या खरीदार के जीएसटीएन (GSTIN) के बिना इनवॉइस बनाया जा सकता है?

जी हाँ, बी2सी (Business to Consumer) उपभोक्ताओं को बिक्री करते समय खरीदार का जीएसटीएन आवश्यक नहीं होता। लेकिन बी2बी (B2B) सौदों में खरीदार द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करने हेतु उसका मान्य 15-अंकीय GSTIN अनिवार्य है।

क्या प्रत्येक जीएसटी बिल पर HSN/SAC कोड लिखना अनिवार्य है?

जी हाँ। पूर्व वित्तीय वर्ष में ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों हेतु 6-अंकीय HSN/SAC अनिवार्य है। ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले व्यवसायों हेतु बी2बी बिलों पर कम से कम 4-अंकीय HSN कोड लिखना आवश्यक है।

यदि बिल पर खरीदार का गलत जीएसटीएन दर्ज हो जाए तो क्या होगा?

गलत GSTIN दर्ज होने पर इनवॉइस सही खरीदार के GSTR-2B में परिलक्षित नहीं होगा, जिससे उसे ITC नहीं मिल पाएगा। इसे ठीक करने हेतु आपको क्रेडिट नोट जारी करके नया संशोधित इनवॉइस बनाना होगा या अगले महीने के GSTR-1 में संशोधन करना होगा।

क्या वस्तुओं (Goods) और सेवाओं (Services) के लिए अलग बिल फॉर्मेट होता है?

मूल अनिवार्य फील्ड्स समान रहते हैं। अंतर केवल यह है कि माल के बिल में HSN कोड, माप की इकाई (जैसे Kg, Pcs) और मात्रा आवश्यक होती है, जबकि सेवाओं के बिल में SAC कोड और सेवा का विस्तृत विवरण लिखा जाता है।

क्या प्रोफॉर्मा इनवॉइस (Proforma Invoice) और टैक्स इनवॉइस एक ही होते हैं?

नहीं। प्रोफॉर्मा इनवॉइस केवल एक प्रारंभिक कोटेशन या अग्रिम अनुमान होता है। यह कोई वैध कर दस्तावेज नहीं है और इसके आधार पर आईटीसी का दावा नहीं किया जा सकता। आपूर्ति होने पर नियम 46 के तहत "टैक्स इनवॉइस" जारी करना अनिवार्य है।

बिल ऑफ सप्लाई (Bill of Supply) क्या होता है और इसे कौन जारी करता है?

बिल ऑफ सप्लाई कंपोजिशन डीलरों द्वारा अथवा पूरी तरह कर-मुक्त (Exempted) वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति पर जारी किया जाता है। इसमें कोई जीएसटी दर या टैक्स राशि नहीं जोड़ी जाती और खरीदार को इस पर आईटीसी नहीं मिलता।

जीएसटी इनवॉइस की कितनी प्रतियां (Copies) तैयार की जानी चाहिए?

वस्तुओं (Goods) की आपूर्ति हेतु 3 प्रतियां आवश्यक हैं: मूल प्रति (Original for Recipient), द्वितीय प्रति (Duplicate for Transporter) और तृतीय प्रति (Triplicate for Supplier)। सेवाओं (Services) हेतु 2 प्रतियां जारी की जाती हैं: मूल प्रति और द्वितीय प्रति।

क्या हस्तलिखित (Handwritten) जीएसटी बिल मान्य होता है?

जी हाँ, यदि हस्तलिखित बिल में नियम 46 के सभी अनिवार्य फील्ड्स मौजूद हों और बिलों की क्रम संख्या (Serial Number) क्रमिक व अद्वितीय हो। हालांकि ऑडिट और रिटर्न फाइलिंग की सुगमता हेतु डिजिटल इनवॉइसिंग को प्राथमिकता दी जाती है।

क्या आप ड्राफ्ट बिल बनाने हेतु तैयार हैं?

हमारे नियम-संगत इनवॉइस जनरेटर के साथ 60 सेकंड के भीतर प्रिंट करने योग्य कोटेशन और ड्राफ्ट बिल तैयार करें।

विधिक स्रोत एवं कार्यप्रणाली

यह सामग्री केंद्रीय माल और सेवा कर (CGST) अधिनियम की धारा 31 और सीजीएसटी नियमों के नियम 46 के प्रावधानों पर आधारित है। नवीनतम अधिसूचनाओं और कानूनी परिवर्तनों को आधिकारिक जीएसटी पोर्टलऔर सीबीआईसी (CBIC) अधिसूचनाओं द्वारा ट्रैक किया जाता है।